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Thursday, November 11, 2010

hamne kya pap kiya hai

हमने क्या पाप किया है ?
प्रेषक : रवि भुनगे
दोस्तो, मेरा नाम रवि है। मैं पुणे
का रहने वाला हूँ। मैं आप
लोगों को अपनी बदचलन
माँ की कहानी सुना रहा हूँ। जो मैं
सोच भी नहीं सकता था वो मुझे आजमाने
को मिला है। क्या बताऊँ दोस्तो !
मैं एक चाल में रहने वाला लड़का हूँ,
नौवीं तक ही पढ़ा हूँ ! मैं पढ़ाई में
कमजोर था लेकिन सेक्स में नहीं ! अब
मेरी उम्र तेईस साल है, मेरे
पिताजी कुछ काम नहीं करते हैं, बस
शराब पीते हैं रोज़ ! इसी वजह से शायद
उनमें अब सेक्स नहीं रहा है, इसी वजह
से मेरी माँ ने दूसरों के साथ सबंध
बनाये हैं। मेरी माँ सुबह काम पर
जाती है और दोपहर को घर आती है और शाम
को जाती तो रात को आठ बजे आती है।
बात उस समय की है जब मैं थोड़ा बीमार
था तो मैं काम से दोपहर को घर
आया था और घर में मैंने देखा कि आज
माँ घर आई नहीं थी। तो मैंने
सोचा कि उसे किसी काम से देर हो गई
होगी। मगर ऐसा नहीं हुआ।
मेरी माँ तो हमारे पड़ोसी अंकल के घर
में थी। उनका दरवाजा बंद देखकर मुझे
शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है। मैंने
उनकी खिड़की के छेद से
देखा कि मेरी माँ और विशाल अंकल
दोनों एक दूसरे की बाहों में हैं।
मेरी माँ की उम्र 45 साल और अंकल
की उम्र 35 साल होगी। फिर भी वो एक
दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे।
यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं
घर जाकर सो गया। उस रात को मैं
सो नहीं पाया। मैंने यह बात अपने
दोस्त से कही कि मेरी माँ और अंकल के
बीच सेक्स सम्बन्ध होता है तो उसने
कहा कि हम दोनों नजर रखेंगे।
मैंने भी हाँ कर दी !
चार-पाँच दिन बाद उसने फोन कर के
मुझे बताया कि मेरी माँ और अंकल
मेरी ही घर में हैं और मुझे घर आने
को कहा। मैं और मेरा दोस्त मेरी घर के
खिड़की से देखने लगे।
मेरी माँ पूरी की पूरी नंगी थी विशाल
अंकल के साथ ! अंकल भी पूरा नंगा था।
मुझे बहुत ही गुस्सा आया लेकिन दोस्त
ने रोका और मुझे चुपचाप देखने
को कहा और मैं देखता रहा।
मेरी माँ अंकल का लण्ड चूस रही थी और
अंकल चुसवा रहा था। 5 मिनट बाद उसने
सारा वीर्य उसके मुँह में डाल
दिया और कहने लगा - ले ले जोर से चूस
ले ! पी ले ... तेरे मर्द में ऐसा रस
नहीं मिलेगा !
माँ ने कहा- इसीलिए तेरा पीती हूँ
ना मेरे जानू ! तेरा लण्ड तो लोहा है !
ऐसा मजा कही नहीं मिलता है !
फिर कुछ देर बाद वो दोनों 69
की अवस्था में आ गए। अंकल माँ की चूत
चाट चाट कर पानी ला रहा था ,
माँ भी लण्ड को चोकोबार की तरह चूसे
जा रही थी। इतने में मेरा और मेरे
दोस्त का लण्ड खड़ा कब हुआ ,
पता ही नहीं चला !
फिर अंकल ने माँ को लिटा कर
उसकी टाँगें कंधे पर लेकर अपना लण्ड
चूत पर रख दिया और चूत में पेलने लगा।
उसका 6 इंच का लण्ड चूत को फाड़
रहा था। साल हरामी जोर जोर के धक्के
मारने लगा। दस बारह मिनट में वो भी थक
गया , वो माँ को पूरी तरह सन्तुष्ट
नहीं कर सका, यह हम जान गए थे।
उनका खेल ख़त्म हो गया और वो कपड़े पहन
रहे थे। हम वहाँ से चले गए। फ़िर अंकल
चले गए और माँ सो गई।
मेरे दोस्त ने कहा- हम भी अंकल
की बीवी को बताकर उसे भी हम चोदते
हैं।
मैंने मना किया।
फिर उसे एक मस्ती सूझी, उसने कहा- आज
मैं तेरे घर सोने आता हूँ।
मैंने हाँ कर दी।
रात को नौ बजे वो खाना खाकर आया।
मेरा बाप तो घर पर सोता नहीं है। हम
टी वी देखकर सो गए - मैं, मेरा दोस्त
और माँ !
रात को बारह बजे मेरे दोस्त ने मुझे
जगाया और मुझे कहा - मैं
क्या करता हूँ, तू सिर्फ देख ! और
मुझे चुप रहने को कहा उसने !
वो माँ के पास जाकर लेट गया और माँ के
बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। माँ सोई
हुई थी और वो माँ को गर्म करने
लगा था। वो माँ के मम्मों पर हाथ फेर
रहा था , मैं देख रहा था। उसने
माँ का ब्लाऊज खोल दिया और मम्मे
चूसने लगा। मैंने भी हिम्मत की और
माँ की दूसरी बाजू में जाकर
दूसरा मम्मा चूसने लगा।
क्या मम्मे हैं ! वाह ! मैं पहली बार
चूस रहा था।
इतने में मेरी माँ जाग गई और एकदम से
घबरा गई और कहा - तुम यह क्या कर रहे
हो ?
मेरे दोस्त ने कहा- हमारा भी लण्ड
चूस कर देखो ! उस अंकल से बहुत
अच्छा है ! उससे चुदवाती हो तो हमने
क्या पाप किया है ?
माँ ने कहा- तुम्हें सब पता है तो फिर
क्या डर है मुझे !
यह सुनकर मेरे तो होश ही गुल हो गए।
मेरे दोस्त ने माँ की साड़ी खोली। अब
माँ सिर्फ और सिर्फ पेटीकोट में थी ,
वो भी मैंने नाड़ा खोलकर नीचे खींच
दिया। अब वो सिर्फ पैन्टी में थी।
उसके ऊपर से मेरे दोस्त ने
चाटना शुरु किया। उसकी चूत से
पानी आने लगा। फिर मैंने अपनी पैंट
उतार दी। मैं और दोस्त सिर्फ
अन्डरवीयर पहने थे। फिर वो चूत चाटने
लगा और मैंने मुँह में लण्ड डाला।
वो जोर से चूसने लगी। मैं उसके मुँह
में चोदने लगा। उधर वो अन्डरवीयर
उतार कर माँ की चूत में लण्ड डालने
लगा था। माँ लेटे लेटे अपनी टाँगें
फैलाने लगी और उसने 8 इंच का लण्ड
माँ की चूत में पेल दिया।
फिर माँ ने मुझे कहा- तुम मेरी गांड
में लण्ड डालो !
मैंने दोस्त को गांड मारने को कहा,
मैं तो चूत मारूँगा ! माँ की गांड
भी मस्त है
फिर उसने माँ को उठा कर बिस्तर पर ऐसे
लिटाया कि मैं चूत के सामने
था तो वो गांड के पीछे !
मुझे उसने कहा- सोच मत ! मार हथोड़ा !
फिर मैंने भी नंगा होकर मेरा सात इंच
का लण्ड माँ की चूत पर टिका दिया। मैं
मम्मे चूस कर चूत में लण्ड घुसाने
की कोशिश रहा था , वो आह आहा अह अ करने
लगी।
मैंने तो अभी लण्ड भी डाला नहीं फिर
कैसे ?
मेरे दोस्त ने गांड भी मार दी थी।
उसने तो पूरा का पूरा लण्ड गांड में
घुसा डाला था ....
वो कहने लगी- जोर जोर से चोदो मुझे !
मैं बहुत प्यासी हूँ लण्ड की !
मैंने भी जोर लगाना शुरु किया और जोर
से चूत में पेल दिया। उसे इतना खुश
कभी नहीं देखा मैंने !
उस रात हमने उसकी खूब चुदाई की।
मैंने सिर्फ चूत मारी , मेरे दोस्त ने
उसके मुँह में, चूत और गांड को चार-
पाँच बार चुदाई की। फिर मैं तो रात के
तीन बजे ही सो गया लेकिन मेरे दोस्त
ने माँ की पाँच बजे तक चुदाई की। इससे
माँ भी खुश थी।
इस तरह मेरा दोस्त जब
भी मौका मिलता है माँ की चुदाई
करता है। मेरी माँ अब उस विशाल से
नहीं चुदती है बल्कि मेरे दोस्त
विकी से चुदती रहती है !
यह मेरी बुरी मगर सच्ची कहानी आप
लोगों को कैसे लगी , मुझे मेल करें और
बताये !
ravibhunge@gamil.com

makan malik ki ladki

मकान मालिक की लड़की
प्रेषक : राहुल गुप्ता
दोस्तो, मेरा आप सभी को प्रणाम ! मैं
राहुल गुप्ता भोपाल का हूँ। मैं
अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूँ।
तो बात उस समय की है जब मैं कॉलेज़ में
पढ़ता था। मेरी आयु 20 साल थी। मैंने
किराए पर कमरा लिया हुआ था। मेरे
मकान मलिक की एक लड़की थी 18 साल
की होगी। वो रोज़ कॉलेज़ में
मिला करती थी और मैं उसे बहुत
देखा करता था। मुझे उसके सेक्सी गोल-
गोल वक्ष टॉप के ऊपर से बड़े अच्छे
लगते थे , स्तन 32 इन्च के तो होंगे।
और उसके चूतड़ तो क्या कहिए !
मानो स्वर्ग है!
एक दिन मैं उसे कॉलेज़ में बोला- आप
मुझसे बात क्यों नही करती ?
वो बोली- मेरी आदत नहीं !
मैं बोला- आदत तो बदलनी पड़ती है
तभी लाइफ का मज़ा है !
वो बोली- कैसा मज़ा? मुझे समझ
नहीं आया !
मैं बोला- आ जाएगा बाबा !
एक दिन उसके घर पर कोई नहीं था। मैं
ऊपर गया , बोला- अंकल हैं?
तो कोई आवाज़ नहीं आई। मैं बोला-
अंकल !!
तो अंदर से आवाज़ आई- घर पर नहीं हैं !
और वो दरवाजा खोल कर बाहर निकली।
मैंने कहा- क्या कर रही हो?
वो जीन्स और टाईट टॉप पहने थी,
बड़ी सेक्सी लग रही थी।
मैं बोला- मैं आ सकता हूँ अंदर?
बोली- क्यों नहीं ! आओ !
मैं बोला- आज सब कहाँ गये?
बोली- मार्केट !
मैं बोला- ओके ! अकेले क्या कर
रही थी ?
बोली- कुछ नहीं ! नेट पर थी !
तो मैंने देखा तो याहू मैसेन्जर
खुला था और वैबकैम पर एक
लड़का नंगा था।
मैं बोला- आपको यह सब पसंद है?
बोली- थोड़ा-थोड़ा !
मैं बोला- कभी किया है?
बोली- नहीं !
मैं बोला- तो आज करते हैं !
बोली- क्या बेहूदा बात करते हो !
मैं बोला- तब कैसे
पता चलेगा कि कैसा लगता है ?
लेकिन उसका मन तो हो ही गया था।
वो बाथरूम में गई और जब लौटी तो उसके
स्तन तने थे। मैं समझ
गया कि लड़की गर्म हो गई है।
मैंने उसे पकड़ कर ज़ोर से अपने से
चिपका लिया और चूमने लगा।
बोली- क्या कर रहे हो राहुल ? मत करो !
मुझे डर लग रहा है ! कोई आ ना जाए !
मैं बोला- चिन्ता मत करो, दरवाजा लॉक
है जी कोई नहीं आएगा।
और हम फिर बेडरूम में चले गये। मैंने
उसका टॉप उतार दिया।
वो गुलाबी ब्रा पहने बड़ी सेक्सी लग
रही थी। उसके स्तन आज़ाद होने को तड़फ़
रहे थे।
मैने उसकी जीन्स भी उतार दी। वो नेट
थोंग पैंटी पहने थी। नेट से हल्के
छोटे छोटे बाल दिखा रहे थे ,
बड़ी सेक्सी लग रही थी पैंटी में !
मैने अपने भी कपड़े जल्दी से उतार
दिए और मैं उसके स्तन चूसने लगा।
धीरे से ब्रा का हुक खोल कर मैंने
ब्रा उतार दी और फ़िर पैंटी भी !
अब हम दोनो नंगे थे। वो मेरा लंड जो 8
इंच का था, उसे ऊपर-नीचे कर रही थी और
चूस रही थी, मैं उसकी फुद्दी को चाट
रहा था।
मैंने उसे सीधा लिटाया और जैसे
ही उसकी चूत पर लण्ड पर
रखा तो वो सी सी सिस
सी अहहहहहहः की आवाज़ निकालने लगी।
मैने झटके से लंड को अंदर डाल दिया।
वो चिल्ला उठी, बोली- मत करो राहुल !
दर्द हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !
अहाआआआ हाआआआ अहहहहहहहा ओह ओऽऽ
और मैं अब उसकी चूत में ही झड़ गया और
उसने भी पानी छोड़ दिया। हम दोनों 30
मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे। फिर उठे और
दोनों बाथरूम में जाकर नहाए। मैंने
उसे ब्रा -पैंटी पहनाई और फ़िर अपने
कमरे में आ गया।
अभी भी मैं वहीं रहता हूँ। अभी तक उसे
मैं चार बार चोद चुका हूँ।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल
करें !
ptu_din@rediff.com

betabi

बेताबी
प्रेषिका : परी
मेरा नाम रेशमा है। मैं इस्लामाबाद
पाकिस्तान से हूँ , मैं विवाहित हूँ,
मेरी उम्र 26 वर्ष है।
यह बात तब की है जब मैं कालेज में थी।
मुझे अपने क्लास के एक लड़के मोइन से
प्यार हो गया। हम दोनों अक्सर कालेज
से घूमने के लिये निकल जाते थे। फिर
दोनों पिक्चर देखने के लिये भी जाने
लगे। हम दोनों धीरे धीरे बहुत करीब
आते गये। मोइन मुझे हमेशा हाथों पर
और फिर धीरे धीरे गालों पर चूम
लेता था।
एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम
लिया। अब वह थोड़ा निडर हो गया था। एक
दिन उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे
होठों को चूम लिया फिर उसने मेरे
कन्धों पर फिर मेरी गर्दन को चूम
लिया। उसने मेरे उरोजों को छू लिया।
पहली बार किसी ने मेरे स्तन छुए थे।
मुझे बहुत अच्छा लगा था। धीमे धीमे
वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने
हाथों से मेरी जाघों को , कभी कभी वह
अपने हाथों से मुझे पीछे से कमर के
नीचे के भाग को दबा देता था। मुझे
बहुत मजा आता था तो मैंने कभी विरोध
नहीं किया।
एक दिन हम दोनों पिक्चर देखने के
लिये गये। हम सबसे पीछे की सीट पर
बैठे थे। हॉल में भीड़ बहुत कम थी। और
हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था।
पिक्चर शुरू होने के 10-12 मिनट बाद
मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धों पर
रखा और अपनी तरफ खींचा। थियेटर में
काफी अन्धेरा था। वह मेरे गालों पर
चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने
होंठ रख दिये। उसकी साँसे बहुत गर्म
थी। हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत
बेताबी से चूमना शुरू कर दिया।
तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के
नीचे महसूस किया। उसका हाथ मेरे
उरोजों को कमीज के ऊपर से दबाने लगा।
इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था।
मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली , मुझे
बहुत मजा आ रहा था।
अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ
मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल
चुका था। उसका हाथ मेरी ब्रा के
कोनों के अन्दर मेरे
स्तनों को सहला रहा था। धीरे धीरे
उसका हाथ मेरे
चुचूकों को अंगुलियों से छेड़ने
लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये। मैं
कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं
क्या करूँ। मेरे पूरे शरीर में अजीब
सी तरंगें दौड़
रही थी जो कि मेरी जिन्दगी में
पहली बार हुआ था। उसने अपने हाथ
को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट
पर रखा और इधर उधर घुमाता रहा। फिर
उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगा। मैं
अपने अन्दर अजीब सा महसूस कर रही थी।
उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और
धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया। उसने
मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के
ऊपर से ही छूआ। मेरे मुँह से उॅहहहहह
करके आवाज निकली , मेरे पैर फैल गये और
उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया।
अपनी अंगुलियों से वह मेरे गुप्तांग
को रगड़ रहा था। उसका ऐसा करना मुझे
पागल बना रहा था। मेरा बदन मेरे वश
में नहीं था मैं अपनी कमर को आगे पीछे
करने लगी थी।
अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज की बटन
बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने
को कहा। मैने वैसा ही किया। हमने
टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पड़े। शाम
हो गई थी , कॉलेज बन्द हो चुका था केवल
एक दो छात्र थे। हम दोनों कॉलेज के
पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये।
कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर
आने की उम्मीद नहीं थी। हमने ऐसी जगह
चुनी जहाँ से हमें कोई देख
नहीं पाये।
हम दोनों दीवार के सहारे खड़े हो गये
और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे
को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया।
उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया।
मेरी कमीज के सारे बटन खोल डाले और
अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे
उरोजों को हाथ में ले लिया। उसने
इतनी जल्दी में यह सब किया कि मुझे
कुछ समझ ही नही आ पाया। उसके इस तरह
से छूने से मुझे करंट सा लगा। उसने
मेरी ब्रा को खोल दिया और
बड़ी बेदर्दी से मेरे स्तनों को मसलने
लगा। मेरे वक्ष एकदम सख्त हो गये। वह
अब मेरे उरोजों को चूमने लगा और मेरे
एक चुचूक को मुँह में ले लिया और
बडी सख्ती से उन्हें चूसने लगा।
उसका हाथ मेरे चूतड़ को मसल रहा था।
उसने मुझे पीछे से अपनी बॉहों में
जकड़ लिया और मेरे वक्ष को दबाने लगा।
उसका सख्त हो चुका अंग मेरे पीछे
चूतड़ में चुभने लगा। उसका हाथ
मेरी कमीज के नीचे मेरे पेट पर टहल
रहा था। शलवार के ऊपर से ही वह मेरे
वस्ति-स्थल को रगड़ रहा था।
मेरी शलवार का वह
हिस्सा गीला हो गया जहाँ उसने
अपना हाथ रखा था और मेरी चूत को रगड़
रहा था। मोइन ने मेरी शलवार खोल दी और
मैंने उसे नीचे गिर जाने दिया।
उसकी अंगुलियॉ सीधे मेरी पैंटी के
अन्दर पहुँच गई और अगले ही पल
उसकी अंगुलियाँ मेरी चूत के अन्दर
पहुँच गई। उन्हें वह अन्दर बाहर करने
लगा। मैंने महसूस किया कि उसका सख्त
लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और
धक्के लगा रहा था। उसने
मेरी पैंटी को नीचे खींच दिया। मुझसे
बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैंने पलट
कर उसकी पैंट खोल डाली और उसके
अन्डरवियर में हाथ डालकर मैंने उसके
अंग को हाथों में ले लिया। उसने
अपनी पैंट नीचे गिरा दी और
मेरी पैंटी को उतार दिया। उसने मुझे
अपनी गोद में उठा लिया मैंने
अपनी टांगों को उसकी कमर में लपेट
लिया। उसका कठोर अंग मेरी चूत के
मुँह को ढूंढने लगा। मैंने उसे अपने
हाथ से पकड़ा और अपनी चूत
का रास्ता दिखाया और एक झटके से
उसका मोटा और कठोर लण्ड मेरे अन्दर
प्रवेश कर चुका था। मुझे लगा कि कोई
जलती हुई चीज मेरे अन्दर घुस गई। मैं
दर्द से तड़प उठी।
उसने मेरे मुँह को एक हाथ से दबाया और
मेरी कमर को एक हाथ से थाम लिया। अगले
ही पल मेरा चुचूक उसके मुँह में था।
वह उन्हें जोर से चूसने लगा।
उसका लण्ड अभी भी मेरे अन्दर ही था।
उसने मेरी कमर को कस कर पकड़
रखा था जिससे मैं ऊपर ही नहीं उठ
पा रही थी। धीरे धीरे मुझे मजा आने
लगा मेरा दर्द जाने कहाँ चला गया।
मैं अपने आप को ऊपर नीचे करने लगी।
उसने वहीं जमीन पर मुझे लिटाया और
मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड
अगले ही पल मेरी चूत में था।
उसका पूरा लण्ड मेरे अन्दर तक
समा रहा था। उसने मेरी कमर
को हाथों से पकड़ा और जोरों से धक्के
देने लगा। इस बीच मेरी चूत से
पानी निकल गया उसने अपनी स्पीड
बढ़ा दी। उसके लण्ड का ऊपर
का सिरा मेरे अन्दर तक पहुँच
रहा था उसका लण्ड मेरे अन्दर और कठोर
और सख्त होता जा रहा था। हम दोनों एक
दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे
थे। अचानक मैंने उसको कसकर पकड़ लिया।
उसने अपनी स्पीड चालू रखी और अगले
ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर
गया तभी मैं एक बार फिर झर गई। वह
मेरे ऊपर ही निढ़ाल हो गया।
हम दोनों बुरी तरह से हाँफ रहे थे। हम
दोनों ने कपड़े पहने एक दूसरे को देख
कर मुस्कुराये , दोनों एक दूसरे से
पूरी तरह से सन्तुष्ट थे।
imsexypari@yahoo.com

Wednesday, November 10, 2010

kalpna sakar hui-2

कल्पना साकार हुई-2
प्रेषक : तनय
अब बारी तृष्णा की थी, उसने विक्रम
का अन्डरवीयर उतारा, अन्डरवीयर के
उतरते ही मैं और तृष्णा विक्रम के
लंड को देख कर आश्चर्यचकित हो गए ,
लगभग 8 या 9 इंच का लंड था। इतने बड़े
लंड को देख के मेरी बीवी के चहरे पर
ख़ुशी छा गई , वो इतने ही लम्बे लंड के
साथ सम्भोग करना चाहती थी।
और फिर क्या ! तृष्णा भी विक्रम के
लंड पर इस प्रकार टूटी जैसे
वो जन्मों -जन्मों की प्यासी हो।
विक्रम के लंड को हाथों से सहला कर,
आगे पीछे करके उसे जी भर कर देखने
लगी। एक लम्बे लंड से चुदने की चाह आज
उसकी पूरी हो रही थी। तृष्णा ने लंड
के सुपारे को चूमा , अब उसने लंड
को चूसना प्रारम्भ किया। कभी वो लंड
को चूसती , कभी वो अण्डों को चूसती,
उसके चूसने के तरीके ने मेरे लंड
को भी खड़ा कर दिया।
मैंने भी अपने कपड़े निकाल कर उसके
मुँह के सामने अपना लंड खड़ा कर
दिया और बोला - लो ! अब दो दो लंड को एक
साथ चूसो !
दो लंड एक साथ देख कर उसको मजे आ गये
और दोनों को एक एक हाथ में पकड़ कर
बारी बारी से चूसने लगी। 15-20 मिनट
चूसने के बाद विक्रम ने
तृष्णा को बिस्तर पर लिटा दिया और
उसकी दोनों टाँगों को चौड़ा किया।
दोनों टाँगों के चौड़ी होते
ही तृष्णा की चिकनी चूत खुल गई और
अन्दर का गुलाबी भाग दिखने लगा। अब
तक तृष्णा की चूत बहुत सारा पानी छोड़
चुकी थी और अब वो चुदने के लिए तैयार
थी।
विक्रम ने एक उंगली तृष्णा की चूत
में डाली , उंगली के अन्दर जाते
ही तृष्णा के मुँह से आह निकली।
विक्रम अब तक तृष्णा के ऊपर आ
चुका था और तृष्णा को अपने आगोश में
लेने को तैयार था। उसने अपने लंड
का मुँह चूत पर रखा और धीरे से एक
धक्का मारा , जिससे विक्रम का आधा लंड
तृष्णा की चूत में चला गया। लंड के
अन्दर जाते ही तृष्णा ने जोरदार
तरीके से सिसकारी भरी। इस दृश्य
को देखने में मुझे
बड़ा मजा आया क्यूंकि इसी नज़ारे
का मैं कितने दिनों से इन्तजार कर
रहा था।
क्या शानदार नजारा था मेरे सामने !
एक लड़का मेरी ही बीवी को चोद
रहा था और मैं दर्शक की तरह इस नज़ारे
को देखते हुए अपने लंड
को सहला रहा था। विक्रम तृष्णा के
होठों का रसपान करते हुए चोदने
की गति बढ़ा देता तो कभी धीरे धीरे
चोदता। उसके स्तनों को चूसते हुए
वो काम क्रीड़ा को चरम सीमा पर
पहुँचाने में लग गया। मेरी बीवी के
मुँह से आज अलग अलग सिसकारियों ,
आहों की आवाजें निकलने लगी।
वो भी कामक्रीड़ा के सागर में गोते
लगाने लगी।
15 मिनट के बाद दोनों के मुँह से
सिसकारियों की आवाजें तेज होने
लगी और दोनों ने एक
लम्बी आह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह भरते हुए
अपना अपना पानी छोड़ दिया। विक्रम
निढाल होकर तृष्णा के नंगे जिस्म पर
लेट गया। तृष्णा उसको धीरे धीरे
प्यार करने, चूमने लग गई। विक्रम
तृष्णा के ऊपर तब तक रहा जब तक
उसका लंड नौ इंच से घट कर तीन इंच
का नहीं रह गया।
तृष्णा अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई
थी और इस नग्न अवस्था में बहुत कामुक
और सुन्दर लग रही थी।
उसने लेटे लेटे ही एक नेपकिन से
विक्रम के वीर्य को साफ़ किया और मुझे
अपनी बाँहों में भरने के लिए
इशारा करने लगी। मैं तृष्णा के पास
पेट के बल लेट गया और उसके स्तन चूसने
लगा। मैं धीरे धीरे उसके जिस्म
को चूमने लगा जिससे वो फिर गर्म हो गई
और एक झटके से उसने मुझे बिस्तर पर
गिराया और मेरे ऊपर आ गई। मेरे लंड
को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के
मुँह पर रखा और एक हल्के धक्के से
मेरे लंड को अपनी चूत में समाने लगी।
पूरा लंड अन्दर जाने के बाद वो मुझसे
चिपक गई। अब वो धीरे धीरे अपनी कमर
चलाने लगी। कमर को चलाते हुए वो मेरे
होठों को चूसती रही।
मैंने तृष्णा से धीरे से पूछा-
मजा आया या नहीं एक पराये लंड
की सवारी करके ?
वो बोली- एकदम मजा आ गया ! उसका लंड
आपसे भी लंबा था। मेरी चूत को फाड़ते
हुए वो चूत की अंतिम दीवार तक को ठोक
रहा था।
वो बोली- विक्रम का लंड लम्बा है और
आप का लंड मोटा है, दो अलग अलग लंड से
चुदने में मजा आ गया।
बातें करते हुए वो गर्म होने लगी और
अपनी कमर को तेज चलाने लगी। वो अब
मेरे ऊपर बैठ कर आगे पीछे होने
लगी जैसे घुड़सवारी कर रही हो।
मैं भी नीचे से हल्के हल्के धक्के
मारने लगा। मैं उसके स्तनों को मसलने
लगा। वो धीरे धीरे अपनी चरमसीमा पर
पहुँचने लगी और एक जोरदार धक्के के
साथ उसने अपना पानी छोड़ दिया। अब
बारी मेरी थी , मैं उसे बिस्तर पर
लिटा कर जोरदार पेलमपेल करने लगा और
अंत में मैंने अपना सारा वीर्य
उसकी चूत में डाल दिया।
दो बार झाड़ने के बाद वो भी निढाल
होकर लेट गई। विक्रम ने हमें खाने
को चिप्स और ज्यूस दिया। बीस मिनट के
ब्रेक में हमने थोड़ी बातचीत की।
विक्रम बातें करते हुए तृष्णा के
वक्ष पर हाथ फेरता ,
कभी तृष्णा की गांड पर हाथ फेरता। अब
विक्रम का लंड तृष्णा के स्पर्श से
फिर खड़ा हो गया और एक बार फिर
तृष्णा की चूत में हंगामा मचाने लगा।
तृष्णा दो बार चुद कर थोड़ी थक गई थी ,
फिर भी नए और लम्बे लंड का मजा लेने
लगी। इस बार चुदाई थोड़ी लम्बी चली।
विक्रम ने अलग अलग काम आसनों के
जरिये चुदाई की। लगभग आधा घंटे
की पेलमपेल करने के बाद दोनों फिर झड़
गए। अब हम तीनों बेड पर पूर्ण -नग्न
ही लेटे रहे।
आधा घंटा सुस्ताने के बाद हम उठे।
तृष्णा ने विक्रम के लंड पर एक
चुम्बन लिया और कहा - तुमको मैं
कभी भूल नहीं सकूंगी।
हम तीनों ने अपने अपने कपड़े पहने।
जाते हुए तृष्णा ने विक्रम को गले
लगा कर चूम लिया और आगे भविष्य
की अनिश्चिताओं को छोड़ते हुए मैंने
और तृष्णा ने विक्रम को अलविदा कहा।
घर लौटते हुए मैं और तृष्णा मंद मंद
मुस्कुरा रहे थे। आज हमने उस काम
को अंजाम दिया जिसकी हम कल्पना करते
थे। आज मुझे विचार आ
रहा था कि अन्तर्वासना पर बहुत
सी कहानियाँ सच भी हैं क्यूंकि अब एक
कहानी मेरे पास भी थी।
दोस्तो, मेरी सच्ची घटना पर आधारित
यह कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरूर
जरूर बतायें।
tanay16dhoot@gmail.com

kalpna sakar hui-1

कल्पना साकार हुई-1
प्रेषक : तनय
मेरा नाम तनय है, मैं इन्दौर का रहने
वाला हूँ। मेरी कपडे की दुकान है।
र्मैं 32साल का हूँ, दिखने में आम
लोगों जैसा हूँ।
मेरी बीवी तृष्णा 26 साल की सांवली,
सुन्दर और सेक्सी बदन की है। वो बहुत
ही कामुक है , हम दोनों बहुत सेक्स
करते हैं, सेक्सी बातें, ओरल सेक्स
सभी प्रकार के सेक्स का मजा लेते
हैं। मैं नेट पर अश्लील वेब साइट
देखता हूँ खासकर
अन्तर्वासना की कहानियाँ बहुत
पढ़ता हूँ। एक कहानी , जिसमें एक युगल
केरल में छुट्टी मनाने जाता है,
वहाँ मालिश वाले से उस युवक
की बीवी मालिश के साथ साथ सेक्स
भी करती है , इस प्रकरण में युवक
को अपनी बीवी को किसी और के साथ सेक्स
करते देखने में बहुत मजा आता है। यह
कहानी पढ़कर मेरे मन में
आया कि क्या मैं भी ऐसा कर सकता हूँ ?
और यही सोच मुझे नये कार्य को करने के
लिए प्रेरित करने लगी।
अपनी बीवी को किसी और के साथ सेक्स
करने के लिए प्रेरित कैसे किया जाये,
मैं यह सोचने लगा। मैंने उसे सबसे
पहले
अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़वाई। फिर
उसे लम्बे लम्बे लंडों के
फोटो दिखाए , सेक्स क्लिप, लंड चूसने
वाले चित्र चलचित्र दिखाए।
15 दिनों की मेहनत के बाद एक रात
अपने मोबाईल पर उसे खड़े लंड के
फोटो दिखा कर सेक्सी बातें करते हुए
मैंने उससे मजाक में पूछा - क्या तुम
किसी दूसरे लंड के साथ सेक्स
करना चाहोगी ?
उसने भी मजाक करते हुए कहा- यदि तुम
करने दो तो मैं कर लूँगी !
फिर क्या था, मैं उसे रोज रात
को सेक्स करते हुए दूसरे के साथ
सेक्स करने की बातें करते हुए
उसकी प्यास बढ़ाता रहा और दिन में नेट
पर अन्तर्वासना फोरम के जरिये एक ऐसे
लड़के की तलाश
करता रहा जो मेरी बीवी के साथ सेक्स
के लिए तैयार हो और
वो हमको जानता भी ना हो क्यूंकि हम एक
अच्छे परिवार से हैं , यदि किसी ऐसे के
साथ सेक्स किया जाये जो हमें
जानता है तो इसमें हमारी इज्जत पर
आंच आ सकती थी। करीब 25 लड़कों से
मैंने नेट पर बात की। इनमें से एक
लड़का विक्रम राज जो इंदौर
का ही रहने वाला है , मैंने उससे बात
को आगे बढ़ाया। विक्रम एक कॉलेज
का छात्र है , वो ऍम.बी.ए. कर रहा है,
मेरे घर से लगभग 18 किलोमीटर दूर शहर
के दूसरे छोर पर रहता है और हम
दोनों में से
किसी को भी नहीं जानता था।
मैंने सबसे पहले विक्रम से एक
मुलाकात की। विक्रम दिखने में चेहरे
से ज्यादा सुन्दर तो नहीं है पर वो एक
गठीले शारीर का मालिक है , साथ
ही वो एक समझदार लड़का है।
सेक्स करने के लिए जगह को उसी के कमरे
को तय किया गया। तारीख 11 फ़रवरी,
2010 दिन गुरुवार, समय दिन के 12
बजे। इस बात को मैंने मेरी बीवी से
छिपा कर रखा , मैं उसे चकित कर
देना चाहता था।
बुधवार की रात मैंने तृष्णा के बदन
की मालिश और नीचे के बाल साफ़ करते हुए
कहा - कल सुबह जल्दी गृहकार्य
निबटा लेना, मार्केट जाना है !
दूसरे दिन सुबह वह घर के सभी काम
समाप्त करके मार्केट जाने के लिए
तैयार हो गई। उसने काले सफ़ेद रंग
का सलवार सूट पहना था , सूट में
वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
ऐसा नहीं लग
रहा था कि उसकी शादी हो गई हो।
हम दोनों मेरी मोटरसाइकल पर नियत
स्थान के लिए रवाना हुए। उसे अभी तक
नहीं मालूम था कि हम कहाँ जा रहे हैं।
शहर को पार करने के बाद वो मुझसे
बोली - हम कहाँ जा रहे हैं? मैंने उसे
बातों में टाल दिया।
विक्रम एक बहुमंजिली इमारत के तीसरे
माले पर रहता है। अपार्टमेन्ट के
नीचे पहुँच कर मैंने
अपनी बीवी को कहा - आज तुम अपनी दूसरे
लंड की प्यास को बुझा लो !
वह यह बात सुनते ही थोड़ा सहम गई,
मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीढ़ियों के
रास्ते हम तीसरे माले पर जाने लगे।
चूंकि मेरे लिए भी यह पहला अवसर
था तो डर मुझे भी लग रहा था। कमरे के
सामने पहुँच कर मैंने
दरवाजा खटखटाया। जैसा मुझे यकीन
था कि दरवाजा खोलने वाला विक्रम
ही होगा , उसने दरवाजा खोला।
मेरी बीवी ने उसे देखते ही मेरा हाथ
कस के पकड़ लिया , उसका गला थोड़ा सूखने
लगा, धड़कन तेज हो गई, सांसो में
थोड़ी तेजी आ गई।
हम अन्दर आ गये, विक्रम ने
हमारा स्वागत हाथ मिला कर किया।
विक्रम ने दरवाजा बन्द कर दिया।
तृष्णा दरवाजे के बगल में लगे डबलबेड
पर बैठ गई। उसने पीने के लिए
पानी माँगा जो विक्रम ने उसे दिया।
अपने गले को पानी से तर करते हुए उसने
अपने आप को थोड़ा संभाला और आगे
की प्रक्रिया के लिए आपने आप
को तैयार किया। मैंने इशारे से
विक्रम को तृष्णा के पास बैठने
को कहा।
वो धीरे से तृष्णा के पास बैठ गया,
तृष्णा की सांसें और तेज हो गई। मेरे
इशारा करते ही विक्रम ने एक हाथ
तृष्णा की जाँघ पर रख दिया। हाथ
का स्पर्श पाते ही तृष्णा की आँखें
बंद हो गई , सांसें और तेज हो गई।
वो अपने आप को सामान्य करने की कोशिश
कर रही थी पर कर नहीं पा रही थी।
उसकी इस हालत को मैं और विक्रम
भली प्रकार से समझ सकते थे
क्यूंकि हम दोनों की भी कुछ हालत इस
प्रकार थी।
विक्रम के हाथ के स्पर्श ने अब
तृष्णा के सेक्स करने की चाह को और
प्रबल बना दिया था। अब विक्रम
को इशारे की जरुरत नहीं थी , उसने एक
मंझे हुए खिलाड़ी के समान अपना काम
शुरू कर दिया। पहले उसने बड़े प्यार
से तृष्णा के शरीर को छूना शुरू किया,
विक्रम के हाथ तृष्णा के स्तनों पर
स्पर्श करते ही तृष्णा के मन में काम
वासना जागने लगी। विक्रम का हाथ अब
तृष्णा के स्तनों की गोलाई नापने
लगा। वो अब गर्म सांसें छोड़ने लगी ,
आँखे बंद, एडी से दूसरे पाँव को दबाते
हुए अपने बदन की अंगड़ाई लेते हुए
ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अब कामदेव
तृष्णा के शरीर में समा गए हों।
विक्रम अपने दोनों हाथों से
तृष्णा की कुर्ती को पकड़ कर निकालने
लगा तो तृष्णा ने उसके हाथ पकड़ लिए
फिर छोड़ दिए। कुर्ती जैसे ही ऊपर हुई
तृष्णा की काले रंग
की पारदर्शी ब्रा दिखने लगी। ब्रा के
अन्दर से दोनों चूचियाँ दिखने लगी।
अगले ही पल तृष्णा सलवार और ब्रा में
थी। उसकी सुन्दरता देख कर मेरा लंड
सख्त हो गया। जब मेरा यह हाल
था तो विक्रम का क्या हाल होगा , यह
विचार मेरे मन में आया।
मेरी नजर विक्रम की पैंट पर पड़ी,
उसका लंड पैंट फाड़ कर बाहर आने
को उतावला हो रहा था। फिर विक्रम ने
ज्यादा देर न करते हुए खुद के भी कपड़े
बदन से अलग करके केवल अन्डरवीयर में
आ गया। अन्डरवीयर से उसका खड़ा लंड अब
अच्छे से दिख रहा था। उसने धीरे से
मेरी बीवी को बिस्तर पर लिटा दिया और
उसके स्तनों का रसपान करने लगा।
मेरी बीवी आँखें बंद करके सेक्स
का मजा लेने लगी।
दस मिनट तक दुग्धपान करने के बाद
विक्रम ने तृष्णा की सलवार उतारी।
सलवार के उतरते ही तृष्णा थोड़ा शरमाई
पर अब शर्म कम और वासना ज्यादा लग
रही थी। पारदर्शी पैंटी में
मेरी बीवी अति कामुक दिख रही थी।
उसकी ऐसी खूबसूरती मैंने पहले
कभी ना देखी थी। वो आज कुछ
ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी , ऐसी दिख
रही थी जैसे कामदेव की पत्नी रति हो।
विक्रम ने तृष्णा की पैंटी भी निकाल
दी , अब तृष्णा पूर्ण रूप से नग्न
अवस्था में दो पुरुषों के सामने
लेटी हुई उन्हें कामक्रीड़ा के लिए
आमंत्रित कर रही थी। तृष्णा की बाल
रहित चूत देख कर विक्रम एक भूखे शेर
की तरह तृष्णा पर टूट पड़ा और
तृष्णा की चूत को चाटने लगा।
इससे आगे की कहानी दूसरे भाग में !

Monday, January 5, 2009

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Sunday, January 4, 2009

in me sabhe stores mere aapne nahe he

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